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पद्मावत और विवाद

एक फिल्म निर्माता एक समुदाय से जुड़े इतिहास पर बिना उनकी अनुमति लिए एक फिल्म अपने अनुसार से बना लेता है,
आपत्तियों के बाद भी अभिव्यक्ति की आजादी के नाम फिल्म दिखाने की जिद करता है, और क़ानूनी आश्रय लेकर फिल्म दिखाता है |
लेकिन म्बंधित समुदाय की धार्मिक और सामाजिक भावनाये आहत होने से उत्पन्न आक्रोश उग्र होकर आन्दोलन का रूप ले लेता है |
देश में अराजकता और अशांति फैलती हैे,जान माल का भारी नुकसान होता है,
कानून व्यवस्था भी बिगड़ती है,देश भर में विरोध प्रदर्शन होता है |
इतने कोलाहल और विरोध के बाद भी वह फिल्म निर्माता फिल्म दिखाने की मांग पर अड़ा रहता है,जिस देश और जिन दर्शकों को फिल्म दिखाकर वह पैसा कमाना चाहता है, जिन लोगों से पैसे कमाकर बॉलीवुड और उसके लोग आज इतना बड़े और धनवान हुए हैं, अपने प्रकाह्र में जिन दर्शकों से मिले प्यार की वो तारीफ करते रहते हैं, आज उन्हीं दर्शकों की भावना उनके लिए कोई मायने नहीं रखती, मायने रखते है तो सिर्फ फिल्म में लगे उनके पैसे और उन पैसे से बनी फिल्म से कमाये जा सकने वाले और पैसे |
मुफ्त में मिले प्रचार (पब्लिसिटी) से फिल्म दिखाकर फिल्मनिर्माता और कलाकार अच्छे खासे पैसे कमा लेंगे, एक दुसरे को दो चार अवार्ड भी बांट कर खुश हो लेंगे | लेकिन सैकड़ों सालों सेे जो राजपूत अपने सम्मान की रक्षा कर रहे हैं, जिनकी महिलाओं ने अपने सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राण दे दिए, उस समुदाय और जिनके सम्मान को छिन्न भिन्न कर उसका इस्तेमाल पैसे कमाने के लिए किया जायेगा उस सम्मान की भरपाई कौन करेगा |
पर इन सबसे उन फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, और इस पूरे घटनाक्रम में लोगों की जो भावनाये आहत होंगी, समाज और देश का नुकसान होगा, समुदाय विशेष के सम्मान को जो ठेस पंहुचेगी, जानमाल का जो नुकसान होगा उसकी भरपाई सिर्फ और सिर्फ हमें ही करनी पड़ेगी |
पर इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी इस विवादित फिल्म को दिखाकर कुछ करोड़ कमाकर बॉलीवुड के लोग कहीं किसी 5* होटल में सक्सेस पार्टी मना रहे होंगे क्योंकि इन्हें पता है की इस देश में एक बहुत बड़ा वर्ग मूर्खों, लालचियों, भ्रष्ट, मानसिक विकलांगों, गुलामों और तथाकथित सेक्युलर लिबरल विचार वाले बुद्धिजीवियों का है, जिनका न कोई धर्म है, न आस्था है, न देश के इतिहास से जुड़ी भावनाये हैं, न विवेक है, न मर्यादा है, न ही कोई आदर्श हैं, और जबतक ऐसे लोग इस देश में हैं इस देश में राज करना, देश को लूटना और कुछ भी कर के पैसे कमाना बहुत आसान है | बात चाहे राजनीती की हो या किसी और मुद्दे की स्थिति एक सामान ही है |
इसलिए कमजोर बने रहो, मूक बनकर अपनी देश, धर्म, इतिहास, संपत्ति और संस्कृति को अपने सम्मुख मिटता और लुटता हुआ देखते रहो |
आधुनिकता विलासिता और छद्म उदारवाद के मायाजाल में फंसे रहकर अपने अंत का पर्व मनाते रहो |
शायद सबकुछ समाप्त हो जाने के बाद हमें थोड़ी अक्ल आ जाये, जैसे समंदर में ही पानी की एक-एक बूंद की कीमत पता चलती है |
धन्यवाद ||
वन्दे मातरम

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